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Tuesday, May 18, 2010

फिर कोई कृष्ण सा ग्वाला हो

फिर कोई कृष्ण सा ग्वाला हो,
फिर मीरां फिर प्याला हो।

फिर चिड़िया कोई खेत चुगे,
फिर नानक रखवाला हो।

फिर सधे पांव कोई घर छोड़ें,
फिर रस्ता गौतम वाला हो।

फिर मरियम की कोख भरे,
फिर सूली चढ़ने वाला हो।

हम घर छोड़ें या फूंक भी दें,
जब साथ कबीरा वाला हो।

3 टिप्पणियाँ:

पृथ्‍वी said...

राजेश जी, सही मायने में हमने तो आप जैसी कुछ 'हस्तियों' से पढना सीखा है. लिखना अभी सीखना है.

बहुत सधे हुए शब्‍द और विस्‍तृत नजरिया.
खूब ..

नीरज गोस्वामी said...

फिर मरियम की कोख भरे,
फिर सूली चढ़ने वाला हो।

राजेश भाई वाह...लाजवाब शेर है...दाद हाज़िर है...
नीरज

दीनदयाल शर्मा said...

फिर चिड़िया कोई खेत चुगे,
फिर नानक रखवाला हो।....वाह.वाह.वाह... लाजवाब

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