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Friday, December 02, 2011

कृष्ण...यानि...कान्हा..और...कान्हा...यानि...मेड़ता की मीरां का समर्पण..../ राजेश चड्ढ़ा


मेड़तली की बात भाईड़ा,
ज्यूं कान्हा को साथ भाईड़ा।
सबद सूत अ’र सुर है तकली,
कात सकै तो कात भाईड़ा ।

...मेड़ता मे जन्मीं मीरां की बात है भाई..
...जैसे कृष्ण-कन्हैया का साथ भाई....
...कृष्ण शब्द और सुर तकली हैं..
...कात सकें तो पूरा जीवन साथ है भाई.....

11 टिप्पणियाँ:

Anju said...

बहुत खूबसूरत ...अति सुंदर ....मेरे कान्हा का एक रंग यहाँ भी आया .....शब्द के सूत को सुर की तकली पर कातना....अच्छा लगा ....

Ashok Kumar said...

सूर के वात्सल्य और कबीर के रहस्यवाद का अनोखा और दुर्लभ योग आपने कर दिखाया वर्णन योग्य शब्द मेरे कोष में नही है*

ਕੀ ਆਖਾਂ ਤੇ ਕੀ ਛੱਡਾਂ ਬੋਲਾਂ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਕੁਝ ਛਾਡ੍ਯਾ ਹੀ ਨਹੀੰ !

कैवण अर सुणण आली तो काईं कोणी छोड़ी; सिर्फ काळजे रे मायीं मसूस ही कर सकां हाँ !!

نہ تو کچھ بولنے کو اور نہ ہی کچھ سنانے کے ؛لئے اپنے کچھ باقی چھوڑا ہے !

خیر مقدم
BEYOND IMAGINATION ONLY FEELINGS

राजेश चड्ढ़ा said...

अंजू जी...कान्हा सब का है या यूं कहें सब कान्हा का ही तो है...
आपको अच्छा लगा..धन्यवाद

राजेश चड्ढ़ा said...

अशोक जी आभार...आप तो स्वयं शब्द-शिल्पी हैं...मर्म तक पहुंच जाते हैं.....कृष्ण का पूर्ण पुरुष का होना और मीरां का समर्पण.. स्वयं शब्दातीत है....आऊटस्पोकन....शुक्रिया आपका

harishharry@blogspot.com said...

dwarka aala nath,eeya hi rakhi sir par hath.

प्रेम सरोवर said...

बेहतरीन प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । . नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभ कामनाएँ ।

Harish Harry said...

2011 ki nai post ka besabri se intejar kar rahen hain...

Harish Harry said...

2012 ki nai post ka besabri se intejar kar rahen hain..

Harish Harry said...

plz add new poem for us.we are waiting for it.

सुमन'मीत' said...

राधा के बिना श्याम आधा ...

Harish Harry said...

rajesh chadha jee ki ghazal youtube par...http://youtu.be/rfA88WcfZzA

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