मैं ग़ज़ल कहता हूँ और
गीत गुनगुनाता हूँ
दिल की करता हुआ
दिल ही में उतर जाता हूँ
प्यार बेहद है मुझे
और है गुनाह यही
प्यार करता हुआ मैं
हद से गुज़र जाता हूँ
नाती अभिमन्यु / चार अलग - अलग मुद्राओं में नाती...
-
हम सपरिवार बेटी के ससुराल कूदन ( सीकर, राजस्थान.) गए . वहां सबसे मिले..
डेढ़ वर्षीय नाती अभिमन्यु की चंचलता ने मन मोह लिया..
चार अलग - अलग मुद्राओं में नात...
‘‘या बणजारी जूण’’ का लोकार्पण
-
सहज और गंभीर सृजनकर्म कालजयी कृतियों को जन्म देता है
- राकेश शर्मा
कोटा/18 नवम्बर 2013/ सहज और गंभीर सृजनकर्म कालजयी कृतियों को जन्म देता है
यह वक्तव्य रा...
अंधविश्वास के खिलाफ एक मुहिम
-
*अंधविश्वास के खिलाफ एक मुहिम*
*तर्कशील बनने का आह्वान*
*अजय कुमार सोनी की राममूर्ती स्वामी के साथ बातचीत*
*परलीका.* इंसान अगर अंधविश्वास का रास्ता छोड़कर ...
परलीका के फोटो- photo gallery
-
अब से दो बरस पहले आठ अगस्त 2008 को अचानक ही बरसात ने आकर आधे से ज्यादा गाँव
को तहस-नहस कर दिया. उस वक्त का मंजर देखने लायक था. घरों की छतें ही गिर जाये
तो ...
0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment